35 Taal System

Thirty-Five (35) Taal System

The Thirty Five Taal System is the foundation and most important part of South Indian Classical Music. There are seven main Taals in south indian music - Ek, Rupak, Jhamp, Triput, dhruv, mathh, atth. The matra value of  laghu in a taal is 4 by default, but when we change the jati of the taal, we change the value of  laghu. Which directly effects the number of matras and forms a new taal. This is the method how 7 main taals transform into 35 taals. Laghu has five Jaatis – Tisra(3), Chaturasra(4), Khanda(5), Misra(7) and Sankeerna(9); and by incorporating 7 Talas X 5 Jaatis, It creates a total of 35 Different Talas. For Example, Dhruva Tala which is representing chatushrajati has 4 2 4 4 ( | O | | ) have one Laghu of Chaturasra Jaati consist of 4 beat power, one Drut of 2 beats followed by two Laghus of  4 beats each. So, It forms a taal with total number of 14 Beats. Now, When we change the power of laghu to 3 to transform it’s jati to Tisra Jaati. It becomes 3 2 3 3 ( | O | | ) 11 Beats Taal. This method is used to change jati of the taal which creates 35 Taals. Now we are adding a chart of all 7 taals showing change of jati for your reference.

Ek Talam – The Natural Value of Laghu is 4 in this Talam.

Rupak Talam – The Natural Value of Laghu is 4 in this Talam.

Aadi/Triput Talam – The Natural Value of Laghu is 3 in this Talam.

Jhamp Talam – The Natural Value of Laghu is 7 in this Talam.

Matya Talam – The Natural Value of Laghu is 4 in this Talam.

Dhruv Talam – The Natural Value of Laghu is 4 in this Talam.

Ata Talam – The Natural Value of Laghu is 5 in this Talam.

 

३५ तालों की प्रणाली

३५ तालों की प्रणाली दक्षिण भारतीय संगीत की आधारशिला तथा अभिन्न अंग है | दक्षिण भारतीय संगीत पद्धति में ७ मुख्य तालें है – एक, रूपक, झंप, त्रिपुट, अठ, मंठ, ध्रुव | इसमें लघु की मात्रा संख्या को ४ माना जाता है, परन्तु लघु की मात्रा संख्या में बदलाव करके ताल की जाति बदली जा सकती है, जोकि सीधे- सीधे ताल की मात्रा संख्या पर अपना असर दिखाते हुए नयी ताल का निर्माण करती है | इसी तरीके से ७ तालों में से ३५ तालों का निर्माण होता है | लघु की ५ जातियां होती हैं - तिस्र(३), चतुश्र(४), खंड(५), मिश्र(७) तथा संकीर्ण(९) | उदाहरण स्वरूप, ध्रुव ताल जो चतुश्र जाति की ताल है की संरचना ४ २ ४ ४ ( | O | | ) है, जिससे हमें १४ मात्रा के ताल की प्राप्ति होती है | अब यदि हम लघु की संख्या को बदलकर ३ करदें तो यह तिस्र जाति ३ २ ३ ३ ( | O | | ) की ११ मात्रा की ताल बन जाएगी | जाति बदलने का यही नियम ३५ तालों की रचना करता है | अब हम ७ मुख्य तालों की जाति बदलने के क्रम को चार्ट के माध्यम से समझेंगे |

एक तालम - इस ताल में लघु की प्राकृतिक मात्रा ४ है।

रूपक तालम - इस ताल में लघु की प्राकृतिक मात्रा ४ है।

आदि/त्रिपुट तालम - इस ताल में लघु की प्राकृतिक मात्रा ३ है।

झम्प तालम - इस ताल में लघु की प्राकृतिक मात्रा ७ है।

मठ्य तालम - इस ताल में लघु की प्राकृतिक मात्रा ४ है।

अठ तालम - इस ताल में लघु की प्राकृतिक मात्रा ५ है।

ध्रुव तालम - इस ताल में लघु की प्राकृतिक मात्रा ४ है।